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मंगसीरी देवी की शादी नौ साल की आयु में हो गई थी। बारात के साथ दूल्हे की जगह, जल से भरा लोटा भेजा गया था। लोटे के साथ ही उनके फेरे हुए थे। शादी के समय दूल्हा अपने घर पर ही था। अब अपनी आयु चार बीसे आठ बरस (88 साल) बताने वालीं दादी खुद भी खुश रहती हैं और दूसरों को भी हंसाती रहती हैं।
गिंवाला गांव की संतोषी बताती हैं, दादी खूब मजाक करती हैं, जिस दिन गांव में नहीं रहती, उस दिन किसी को भी अच्छा नहीं लगता। दादी के बिना गांव सुनसान रहता है। दूसरों की प्रसन्नता का ख्याल रखने वाली दादी का जीवन कैसा रहा, उन्होंने किन चुनौतियों का सामना किया, पर हमने उनसे बात की।
रुद्रप्रयाग के गिंवाला गांव की रहने वालीं दादी मंगसीरी देवी की शादी को 79 साल हो गए। दादी गढ़वाली बोली में अपने विवाह के बारे में बताती हैं। उनके साथ हमारे संवाद को संतोषी हिन्दी में अनुवाद करती हैं।
दादी की शादी के समय बारात में दूल्हे की जगह जल से भरा लोटा भेजा गया था। दूल्हा उस समय अपने घर पर ही रहा। शादी के मंडप में थाली में जल से भरा लोटा और जलता हुआ दीया रखा गया था। ब्राह्मण ने इस लोटे के साथ दादी के फेरे कराए थे। वो बचपन के दिन सहेलियों के साथ खेलने कूदने, स्कूल जाने के थे, पर उस आयु में दादी के लिए मायके से ससुराल जाने की बेला थी।
दादी बताती हैं, ” लड़का कुछ लोगों के साथ मुझे देखने के लिए गांव में आया था, उस समय हम चार लड़कियां खेल रही थीं। हमें यह बताया गया था कि ये लोग गाय देखने आए हैं। अगर, हमें पता चलता कि ये शादी के लिए लड़की देखने आए हैं, तो हम छिप जाते।
हमारे परिवार के ही किसी एक ने मेरे को हाथ से हल्का सा धक्का देकर कहा, कहां है वो गाय। इसका मतलब यह था कि वो लड़की देखने वाले लोगों को इशारा करके बता रहे थे कि यही है वो लड़की, जिसकी शादी होनी है। ” ” हमारी पसंद का कोई सवाल ही नहीं था, उस समय ऐसा नहीं होता था,”
दादी मंगसीरी देवी का कहना है। ” मेरे पिता ने मना कर दिया था कि लड़का बड़ा है और लड़की बहुत छोटी है। यह लड़के की दूसरी शादी थी, पर उन लोगों ने मेरे पिता को बरगलाकर हां करा दी। उस समय एक बार, हां हो जाती थी, तो फिर जुबान से फिरने का कोई मतलब नहीं था। मेरी शादी हो गई।मैंने स्कूल नहीं देखा।
बचपन में शादी हो गई, हम तो ससुराल में बच्चों के साथ खेलते रहते थे। हम झूला खूब झूलते थे। सास बहुत प्यार करती थी,” मंगसीरी देवी बताती हैं।

