मानव भारती की पहल रेडियो केदार के विशेष कार्यक्रम में, डॉ. सुनील थपलियाल की भेंट वार्ता सुधान सिंह कैंतुरा जी से, जो एफआरआई (FRI) में रिसर्च स्कॉलर होने के साथ-साथ पहाड़ की लोक कला, संस्कृति के मर्मज्ञ और एक प्रख्यात गीतकार भी हैं।
इस चर्चा में हिमालयी साहित्य की गहराई, लोक परंपराओं के स्वरूप और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विस्तार से बात की गई है। कैंतुरा जी ने साझा किया कि कैसे लोक गीत और कला पीढ़ियों के बीच एक सेतु का काम करते हैं और साहित्य किस तरह समाज की पहचान को परिभाषित करता है।
वार्ता के मुख्य बिंदु:
- पहाड़ों की लोक कला का वास्तविक स्वरूप।
- पहाड़ी साहित्य का विकास और वर्तमान चुनौतियाँ।
- एक गीतकार और शोधकर्ता के रूप में सुधान सिंह कैंतुरा का अनुभव।
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए उत्तराखंड की सांस्कृतिक जड़ों को सहेजना।

